रायपुर । महाराष्ट्र मंडल ने गुरुवार 25 नवंबर को आलोचक द्वय राजेन्द्र मिश्र व जयप्रकाश को गजानन माधव मुक्ति बोध सम्मान से नवाज़ा। उन्हें पुरस्कार स्वरूप 11 हज़ार रुपए नकद, शॉल, श्रीफल, हिंदी -मराठी में प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2009 व 2010 के लिए दिया गया। इनका चयन विनोदकुमार शुक्ल, डॉ. आलोक वर्मा तथा कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति सच्चिदानंद जोशी ने किया था।

रायपुर के संत ज्ञानेश्वर सभागार में आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि नागपुर के वरिष्ठ साहित्यकार श्रीपाद भालचंद्र जोशी थे। उन्होंने "आतंकवाद का माध्यम और माध्यमों का आतंकवाद" पर बोलते हुए कहा कि माध्यम गेटकीपर से बनकर घर मालिक बन चुका है। यह इच्छित विचार को लादने का षडयंत्र है। हमें क्या देखना, क्या खाना है, क्या सुनना और पहनना है यह माध्यम ही तय करता है। श्री जोशी ने कहा कि मित्रों की हिंसा को अहिंसा माने और जो दुश्मन है उसे किसी भी माध्यम से कुचलने में बुराई नहीं है।

.कार्यक्रम के संयोजक अरुण काठोटे और रविन्द्र ठेंगड़ी ने बताया कि मुक्तिबोध सम्मान प्रदेश के साहित्यकारों के लिए 1999 से शुरू किया गया है। अब तक इस सम्मान से नारायणलाल परमार, श्यामलाल चतुर्वेदी, रमाकांत श्रीवास्तव, प्रभाकर चौबे, कुंतल गोयल तथा देवीसिंह चौहान को सम्मानित किया गया है। पिछले वर्ष पुरस्कार नहीं दिया गया था, इसलिए इस बार एक साथ दो साहित्कारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन दिव्या चतुर्वेदी ने किया। इस मौक़े पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के कुलपति सच्चिदानंद जोशी, वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैय्यर और महाराष्ट्र मंडल परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

(रायपुर से रिपोर्ट )

1 comments:

मनोज पाण्डेय said... December 2, 2010 at 11:14 AM

बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

 
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